श्री खाटू श्याम चालीसा
खाटू श्याम जी — **महाभारत के वीर बर्बरीक**, **श्रीकृष्ण के वरदानी**, **कलयुग के संकटमोचक**। तीन बाणों से युद्ध जीतने वाले, सिर दान कर **धर्म की रक्षा** करने वाले। खाटू में **सिर रूप में विराजमान**। यह चालीसा **नाम जप, भक्ति, और समर्पण** का महामंत्र है। रोज़ पढ़ने से **संकट नाश, मनोकामना पूर्ति, और आत्मिक शांति** मिलती है।
॥ दोहा ॥
श्री गुरु चरण ध्यान धर, सुमिरि सच्चिदानन्द।
श्याम चालीसा भजत हूँ, रच चैपाई छन्द॥
Shree Guru Charan Dhyaan Dhar, Sumiri Sachchidaanand।
Shyaam Chaaleesa Bhajat Hoon, Rach Chaipaee Chhand॥
गुरु चरणों का ध्यान कर, सच्चिदानंद को स्मरण कर — मैं **श्याम चालीसा भजता हूँ**, **चौपाई छंद में रचता हूँ**।
गहरी व्याख्या: **साधना का प्रारंभ गुरु और ईश्वर से**। यह **श्रद्धा और समर्पण** की नींव है। आज के समय में यह **ध्यान और आभार** की प्रैक्टिस है।
॥ चौपाई ॥
श्याम श्याम भजि बारम्बारा, सहज ही हो भवसागर पारा।
इन सम देव न दूजा कोई, दीन दयालु न दाता होई॥
Shyaam Shyaam Bhaji Baarambaara, Sahaj Hee Ho Bhavasaagar Paara।
In Sam Dev Na Dooja Koee, Deen Dayaalu Na Daata Hoee॥
श्याम नाम बार-बार भजने से भवसागर सहज पार। इनके समान **कोई देवता नहीं**, **दीनदयालु दाता कोई नहीं**।
गहरी व्याख्या: **नाम जप = सबसे सरल साधना**। यह **भक्ति का सार** है।
भीमसुपुत्र अहिलवती जाया, कहीं भीम का पौत्र कहाया।
यह सब कथा सही कल्पान्तर, तनिक न मानों इनमें अन्तर॥
Bheemasuputr Ahilavatee Jaaya, Kaheen Bheem Ka Pautr Kahaaya।
Yah Sab Katha Sahee Kalpaantar, Tanik Na Maanon Inamen Antar॥
भीम पुत्र, अहिलवती जन्म**, कुछ **भीम का पौत्र** कहते हैं। **कथा सत्य है**, **अंतर न मानें**।
गहरी व्याख्या: **नाम और रूप भिन्न**, **तत्व एक**।
बर्बरीक विष्णु अवतारा, भक्तन हेतु मनुज तनु धारा।
वसुदेव देवकी प्यारे, यशुमति मैया नन्द दुलारे॥
Barbareek Vishnu Avataara, Bhaktan Hetu Manuj Tanu Dhaara।
Vasudev Devakee Pyaare, Yashumati Maiya Nand Dulaare॥
बर्बरीक विष्णु अवतार**, भक्तों के लिए **मनुष्य शरीर धारण**। **वसुदेव-देवकी, यशोदा-नंद के लाड़ले**।
गहरी व्याख्या: **श्याम = कृष्ण का ही रूप**।
मधुसूदन गोपाल मुरारी, बृजकिशोर गोवर्धन धारी।
सियाराम श्री हरि गोविन्दा, दीनपाल श्री बाल मुकुन्दा॥
Madhusoodan Gopaal Muraaree, Brjakishor Govardhan Dhaaree।
Siyaaraam Shree Hari Govinda, Deenapaal Shree Baal Mukunda॥
**मधुसूदन, गोपाल, मुरारी, गोवर्धन धारी, सियाराम, गोविंद, बाल मुकुंद**।
गहरी व्याख्या: **श्याम के अनेक नाम** — सभी **कृष्ण के ही**।
दामोदर रणछोड़ बिहारी, नाथ द्वारिकाधीश खरारी।
नरहरि रूप प्रहलद प्यारा, खम्भ फारि हिरनाकुश मारा॥
Daamodar Ranachhod Bihaaree, Naath Dvaarikaadheesh Kharaaree।
Narahari Roop Prahalad Pyaara, Khambh Phaari Hiranaakush Maara॥
**दामोदर, रणछोड़, द्वारिकाधीश, नरहरि** — **प्रह्लाद के प्यारे**, **हिरण्यकशिपु मारा**।
राधा वल्लभ रुक्मिणी कंता, गोपी बल्लभ कंस हनंता।
मनमोहन चितचोर कहाये, माखन चोरि चोरि कर खाये॥
Raadha Vallabh Rukminee Kanta, Gopee Ballabh Kans Hananta।
Manmohan Chitachor Kahaaye, Maakhan Chori Chori Kar Khaaye॥
**राधा-रुक्मिणी प्रिय, कंस हंता, माखन चोर**।
मुरलीधर यदुपति घनश्याम, कृष्ण पतितपावन अभिराम।
मायापति लक्ष्मीपति ईसा, पुरुषोत्तम केशव जगदीशा॥
Muralidhar Yadupati Ghanashyaam, Krishna Patitapaavan Abhiraam।
Maayaapati Lakshmeepati Eesa, Purushottam Keshav Jagadeesha॥
**मुरलीधर, घनश्याम, पतितपावन, जगदीश**।
विश्वपति त्रिभुवन उजियारा, दीनबन्धु भक्तन रखवारा।
प्रभु का भेद कोई न पाया, शेष महेश थके मुनियारा॥
Vishvapati Tribhuvan Ujiyaara, Deenabandhu Bhaktan Rakhavaara।
Prabhu Ka Bhed Koee Na Paaya, Shesh Mahesh Thake Muniyaara॥
**विश्वपति, दीनबन्धु**, **शेष-महेश भी थक गए**।
नारद शारद ऋषि योगिन्दर, श्याम श्याम सब रटत निरन्तर।
कवि कोविद करि सके न गिनन्ता, नाम अपार अथाह अनन्ता॥
Naarad Shaarad Rshi Yogindar, Shyaam Shyaam Sab Ratat Nirantar।
Kavi Kovid Kari Sake Na Ginanta, Naam Apaar Athaah Ananta॥
**नारद, शारदा, योगी — सभी श्याम नाम रटते हैं**। **नाम अनंत**।
हर सृष्टि हर युग में भाई, ले अवतार भक्त सुखदाई।
हृदय माँहि करि देखु विचारा, श्याम भजे तो हो निस्तारा॥
Har Srshti Har Yug Mein Bhaee, Le Avataar Bhakt Sukhadaee।
Hrday Maanhi Kari Dekhu Vichaara, Shyaam Bhaje To Ho Nistaara॥
**हर युग में अवतार**, **श्याम भजने से निस्तार**।
कीर पड़ावत गणिका तारी, भीलनी की भक्ति बलिहारी।
सती अहिल्या गौतम नारी, भई श्राप वश शिला दुखारी॥
Keer Padaavat Ganika Taaree, Bheelanee Kee Bhakti Balihaaree।
Satee Ahilya Gautam Naaree, Bhee Shraap Vash Shila Dukhaaree॥
**गणिका, भीलनी, अहिल्या — सभी तारे गए**।
श्याम चरण रच नित लाई, पहुँची पतिलोक में जाई।
अजामिल अरु सदन कसाई, नाम प्रताप परम गति पाई॥
Shyaam Charan Rach Nit Laee, Pahunchee Patilok Mein Jaee।
Ajaamil Aru Sadan Kasaee, Naam Prataap Param Gati Paee॥
**अजामिल, कसाई — नाम से मुक्ति**।
जाके श्याम नाम अधारा, सुख लहहि दुख दूर हो सारा।
श्याम सुलोचन है अति सुन्दर, मोर मुकुट सिर तन पीताम्बर॥
Jaake Shyaam Naam Adhaara, Sukh Lahahi Dukh Door Ho Saara।
Shyaam Sulochan Hai Ati Sundar, Mor Mukut Sir Tan Peetaambar॥
**श्याम नाम आधार — सुख, दुख नाश**। **मोर मुकुट, पीतांबर**।
गल वैजयन्तिमाल सुहाई, छवि अनूप भक्तन मन भाई।
श्याम श्याम सुमिरहुं दिनराती, शाम दुपहरि अरु परभाती॥
Gal Vaijayantimaal Suhaee, Chhavi Anoop Bhaktan Man Bhaee।
Shyaam Shyaam Sumirahun Dinaraatee, Shaam Dupahari Aru Parabhaatee॥
**वैजयंती माला, अनुपम छवि**। **दिन-रात सुमिरन**।
श्याम सारथी सिके रथ के, रोड़े दूर होय उस पथ के।
श्याम भक्त न कहीं पर हारा, भीर परि तब श्याम पुकारा॥
Shyaam Saarathee Sike Rath Ke, Rode Door Hoy Us Path Ke।
Shyaam Bhakt Na Kaheen Par Haara, Bheer Pari Tab Shyaam Pukaara॥
**श्याम सारथी**, **भक्त कभी नहीं हारता**।
रसना श्याम नाम पी ले, जी ले श्याम नाम के हाले।
संसारी सुख भोग मिलेगा, अन्त श्याम सुख योग मिलेगा॥
Rasana Shyaam Naam Pee Le, Jee Le Shyaam Naam Ke Haale।
Sansaaree Sukh Bhog Milega, Ant Shyaam Sukh Yog Milega॥
**नाम रस पी लो**, **संसार और परम सुख**।
श्याम प्रभु हैं तन के काले, मन के गोरे भोले भाले।
श्याम संत भक्तन हितकारी, रोग दोष अघ नाशै भारी॥
Shyaam Prabhu Hain Tan Ke Kaale, Man Ke Gore Bhole Bhaale।
Shyaam Sant Bhaktan Hitakaaree, Rog Dosh Agh Naashai Bhaaree॥
**तन काला, मन गोरा**, **रोग-दोष नाश**।
प्रेम सहित जे नाम पुकारा, भक्त लगत श्याम को प्यारा।
खाटू में है मथुरा वासी, पार ब्रह्म पूरण अविनासी॥
Prem Sahit Je Naam Pukaara, Bhakt Lagat Shyaam Ko Pyaara।
Khaatoo Mein Hai Mathura Vaasee, Paar Brahm Pooran Avinaasee॥
**प्रेम से पुकारने पर प्यारे लगते हैं**। **खाटू में मथुरा वासी**।
सुधा तान भरि मुरली बजाई, चहुं दिशि नाना जहाँ सुनि पाई।
वृद्ध बाल जेते नारी नर, मुग्ध भये सुनि वंशी के स्वर॥
Sudha Taan Bhari Muralee Bajaee, Chahun Dishi Naana Jahaan Suni Paee।
Vrddh Baal Jete Naaree Nar, Mugdh Bhaye Suni Vanshee Ke Svar॥
**मुरली की धुन से सब मुग्ध**।
दौड़ दौड़ पहुँचे सब जाई, खाटू में जहाँ श्याम कन्हाई।
जिसने श्याम स्वरूप निहारा, भव भय से पाया छुटकारा॥
Daud Daud Pahunche Sab Jaee, Khaatoo Mein Jahaan Shyaam Kanhaee।
Jisane Shyaam Svaroop Nihaara, Bhav Bhay Se Paaya Chhutakaara॥
**खाटू में दर्शन से भव भय मुक्ति**।
॥ दोहा ॥
श्याम सलोने साँवरे, बर्बरीक तनु धार।
इच्छा पूर्ण भक्त की, करो न लाओ बार॥
Shyaam Salone Saanvare, Barbareek Tanu Dhaar।
Ichchha Poorn Bhakt Kee, Karo Na Lao Baar॥
साँवरे बर्बरीक — **भक्त की इच्छा तुरंत पूरी करो**।
॥ इति खाटू श्याम चालीसा सम्पूर्णम् ॥