श्री सरस्वती वंदना
विद्या-बुद्धि-कला हेतु
॥ दोहा ॥
या देवी सर्वभूतेषु,
विद्या रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै,
नमस्तस्यै नमो नमः ॥
वंदना
जय सरस्वती माता, जय विद्या दाता,
वीणा वादिनी, श्वेत वस्त्र धारिणी।
हंस वाहन पर विराजमान,
बुद्धि प्रदायिनी, कला सृजनहारिणी ॥
पुस्तक हाथ में लिए हुए,
माला गले में सुशोभित।
कमल पर विराजमान माँ,
भक्तों का मन हर लेती हो ॥
वसंत पंचमी पर पूजी जाती,
विद्या की देवी कहलाती हो।
विद्यार्थी की बुद्धि बढ़ाती,
कलाकार को प्रेरणा देती हो ॥
जो नित्य वंदना करता है,
उसकी बुद्धि तेज हो जाती है।
परीक्षा में सफलता मिलती,
विद्या का वरदान पाता है ॥
श्वेत कमल पर विराजमान,
श्वेत वस्त्र से सज्जित माँ।
चार भुजाएँ, चार दिशाएँ,
ज्ञान का प्रकाश बिखेरती हो ॥
वीणा की धुन से जग जागे,
अज्ञान का अंधकार भागे।
विद्या का दीपक जलाओ माँ,
भक्तों के मन में बस जाओ ॥
जो भक्त श्रद्धा से पुकारे,
उसका बेड़ा पार कराओ माँ।
बुद्धि की देवी, ज्ञान की मूर्ति,
कृपा दृष्टि मुझ पर डालो ॥
ब्रह्मा की पत्नी, विष्णु की शक्ति,
शिव की अर्धांगिनी माँ।
त्रिदेव की जननी कहलाती,
विद्या की अधिष्ठात्री हो ॥
जो इस वंदना का पाठ करे,
उसकी बुद्धि चमक उठे।
विद्या में निपुणता आए,
कला में कुशलता पाए ॥
माँ तुम बिन ज्ञान कहाँ से आए,
तुम बिन बुद्धि कहाँ से पाए।
चरणों में शीश झुकाता हूँ,
कृपा करो माँ कृपा करो ॥
हंस पर सवार होकर आओ,
वीणा बजाकर गाओ माँ।
विद्यार्थी के मन में बसो,
कलाकार के हृदय में बसो ॥
श्वेत कमल की माला पहने,
पुस्तक हाथ में लिए हुए।
जप माला से जप कराओ,
ज्ञान का मार्ग दिखाओ ॥
जो नित्य दीप जलाता है,
तुम्हारे चरणों में आता है।
उसकी बुद्धि तेज हो जाती,
विद्या का वरदान पाता है ॥
माँ तुम्हारी जय-जयकार हो,
चारों दिशा में गुंजार हो।
भक्तों के मन में बस जाओ,
कृपा का सागर बरसाओ ॥
विद्या की देवी, बुद्धि की दाता,
कला की सृजनहारिणी माँ।
वसंत पंचमी पर विराजो,
भक्तों का कल्याण करो ॥
जो इस वंदना को गाता है,
उसका जीवन सफल हो जाता है।
विद्या में उन्नति होती है,
बुद्धि में तेज बढ़ता है ॥
माँ तुम्हारी महिमा अपार,
कोई न जाने तुम्हारा पार।
करुणा सागर, दया की मूर्ति,
भक्तों के दुख हरने वाली ॥
जय सरस्वती माँ, जय जय सरस्वती,
विद्या दाता, बुद्धि प्रदाता।
वीणा वादिनी, हंस वाहिनी,
भक्तों की तुम हो रखवाली ॥
जो भी माँगा, तुमने दिया,
जो भी पुकारा, तुमने सुन लिया।
कृपा करो माँ, कृपा करो,
चरणों में स्थान दो माँ ॥
॥ दोहा ॥
यही फल है वंदना का,
विद्या-बुद्धि की बरसात।
माँ सरस्वती मन में बसें,
अज्ञान का हो नाश ॥
जो नित्य यह वंदना गावे,
माँ सरस्वती कृपा बरसावे।
बुद्धि मिले, विद्या मिले,
जीवन में सफलता पावे ॥